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Shattila Ekadashi 2026 Vrat Katha Book: कर रहे हैं व्रत? तो ये कथा की किताब आएगी काम

Makar Sankranti And Shattila Ekadashi 2026 : 14 जनवरी को मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का संयोग है, जो हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन सूर्य देव की पूजा और तिल दान का विशेष महत्व है. षटतिला एकादशी पर तिल के छह प्रकार के उपयोग से पाप नष्ट होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है.

Shattila Ekadashi 2026 Vrat Katha Book: कर रहे हैं व्रत? तो ये कथा की किताब आएगी काम
Shattila Ekadashi-Makar Sankranti का ये है दुर्लभ संयोग. फोटो: Meta AI

Makar Sankranti And Shattila Ekadashi 2026 : आज 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. लेकिन इस दिन को खास बना रही है षटतिला एकादशी जी हां, आज षटतिला एकादशी 2026 भी है. इन दोनों का संयोग हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है. मकर संक्रांति पर सूर्य मकर राशि में जाते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है. इस दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना गया है. संक्रांति पर अन्न दान के साथ अन्य पुण्य कर्म किए जाते हैं और गुड़-तिल से बने खाद्य पदार्थों के सेवन और दान का भी विशेष महत्व है. साथ ही सूर्य देव को जल देने का भी विशेष महत्‍व है.

इस बार मकर संक्रांति 2026 के साथ ही माघ मास की कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी 2026 भी पड़ रही है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होती है. 'षटतिला' का अर्थ है छह प्रकार से तिल का उपयोग. तिल को पवित्र और शुभ फल देने वाला माना जाता है. इस एकादशी पर तिल से जुड़े कार्य करने से पापों का नाश होता है, गरीबी दूर होती है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

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उत्तरायण काल में किए गए दान, व्रत और भक्ति का कई गुना फल मिलता है. इसलिए इस संयोग में तिल दान का महत्व और भी बढ़ जाता है. षटतिला एकादशी पर तिल का छह तरह से उपयोग करने की परंपरा है. पहला तिल मिले हुए पानी से स्नान करना. शरीर पर तिल का लेप लगाना. हवन में तिल की आहुति देना. ब्राह्मण या जरूरतमंद लोगों को तिल दान करना. व्रत के नियमों के अनुसार तिल से बने व्यंजन खाना और तिल मिश्रित जल पीना या पितरों को तर्पण करना शामिल है. ये सभी कार्य करने से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं.

आज का दृक पंचांग | 16 Jan 2026 Panchang

वहीं, दृक पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी को एकादशी तिथि शाम 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी. बुधवार को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, इस दौरान कोई नया शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए. अनुराधा नक्षत्र 15 जनवरी सुबह 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगा. चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेंगे.

सूर्योदय 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 45 मिनट पर होगा.

अगर आप भी षटतिला एकादशी 2026 पर व्रत करते हैं, तो आपके पास कथा की किताब, तिल, विष्‍णु जी की तस्‍वीर जरूर होनी चाहिए. समय गवाएं बिना आज ही इन्‍हें ऑर्डर करें.

1. षटतिला एकादशी व्रत कथा: Shattila Ekadashi Vrat Katha (Hindi Edition)

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इनपुट: IANS

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