बच्चे की सेहत और विकास को लेकर हर पैरेंट काफी चिंतित रहते हैं. जब बच्चा छह महीने का होता है और उसे धीरे-धीरे ठोस आहार देना शुरू किया जाता है, तब माता-पिता के लिए यह समझना बेहद जरूरी होता है कि उसकी प्लेट में किन-किन चीजों को जगह दी जाए. इस उम्र में सिर्फ पेट भरना ही काफी नहीं होता, बल्कि ऐसा पौष्टिक खाना देना जरूरी होता है, जो बच्चे की शारीरिक और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाए.
बच्चे का मानसिक विकास उसके खान-पान, नींद, खेल, बातचीत, आसपास के माहौल और देखभाल समेत कई चीजों पर निर्भर करता है. लेकिन अगर कुछ पोषक खाद्य पदार्थ उसकी डाइट में शामिल कर दें, तो विकास बेहतर तरीके से होता है. अगर आप भी इन खाद्य पदार्थों को खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, तो Amazon आपको बेहतर दाम में टॉप ब्रांड के प्रोडक्ट ऑफर कर रहा है. लेकिन पहले आइए जानते हैं, ये किस तरह का खाना है, और इसके फायदे क्या हैं.
अखरोट से तैयार प्यूरी या पाउडर
अखरोट को बच्चों के लिए पोषक आहार माना जाता है. इसमें हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं और यह प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैटी एसिड का भी स्रोत है. ओमेगा-3 फैट शरीर और दिमाग के सामान्य विकास के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में शामिल है. इसके अलावा अखरोट में एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड भी पाए जाते हैं. छह महीने के बाद बच्चे को अखरोट सीधे टुकड़ों के रूप में देने के बजाय बहुत बारीक पिसे हुए रूप में देना सही रहता है. अखरोट को हल्का भूनकर उसका पाउडर तैयार करें. इसे बच्चे के लिए बनाए गए दलिया, दही या किसी फल की प्यूरी में थोड़ी मात्रा में मिलाए.
बता दें कि साबुत या बड़े टुकड़ों में मेवे छोटे बच्चों के लिए चोकिंग का खतरा पैदा कर सकते हैं. इसलिए उनकी बनावट बच्चे की उम्र और निगलने की क्षमता के अनुसार ही रखें. पहली बार कोई नया खाद्य पदार्थ देते समय एलर्जी के संभावित लक्षणों पर भी नजर रखना जरूरी है.
राजगीरा में भी कई जरूरी पोषक तत्व
राजगीरा भी छोटे बच्चों के लिए तैयार किए जाने वाले भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है. इसमें प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. आयरन बच्चे की सामान्य वृद्धि और शरीर में जरूरी प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि प्रोटीन शरीर के ऊतकों और विकास में भूमिका निभाता है. बच्चे के लिए राजगीरा तैयार करते समय इसे अच्छी तरह पकाना जरूरी है, ताकि वह पूरी तरह नरम हो जाए और बच्चे के लिए निगलना आसान रहे. इसमें अच्छी तरह मैश की हुई सब्जियां मिलाएं. स्वाद को हल्का मीठा बनाने और भोजन में अलग-अलग पोषक तत्व जोड़ने के लिए शकरकंद या सेब की प्यूरी भी मिलाई जा सकती है.
किशमिश
किशमिश कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होती है. ये न केवल खून बढ़ाती है, बल्कि कैल्शियम, फाइबर और आयरन का मुख्य सोत् भी कही जाती है. यही कारण है कि बच्चों की डाइट में इसे जरूर शामिल किया जाना चाहिए.
बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट के लिए अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे देना जरूरी है, ताकि उसे सभी जरूरी पोषक तत्व मिल सकें. साथ ही, छह महीने की उम्र के बाद भी मां का दूध बच्चे के लिए महत्वपूर्ण होता है और पूरक आहार इसके साथ धीरे-धीरे शुरू किया जाता है.
इनपुट: IANS
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