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This Article is From Mar 06, 2026

कहीं आप भी तो नहीं खा रहे सीधा क्रीम से बना घी? आज ही खरीदें ये नेचुरल घी

Best type of ghee for health: बाजार में मिलने वाला घी अकसर मिलावटी होता है, जिसमें क्रीम से निकला घी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक फैट देता है जबकि प्राकृतिक घी पाचन और सेहत के लिए बेहतर है. आयुर्वेद में घी को श्रेष्ठ फैट माना गया है, जो दूध से दही जमाकर माखन निकालने और फिर पकाने की पारंपरिक विधि से बनाया जाता है, जिससे पोषण और स्वास्थ्य लाभ बढ़ता है. क्रीम से सीधे निकाला गया घी मोटापा और बीमारियां बढ़ाता है, जबकि प्राकृतिक तरीके से बना घी पाचन में सहायक, बलवर्धक और शरीर को पोषण देता है.

कहीं आप भी तो नहीं खा रहे सीधा क्रीम से बना घी? आज ही खरीदें ये नेचुरल घी
Desi ghee पर आ गया है बंपर डिस्‍काउंट. फोटो: Freepik

Best type of ghee for health: आज के समय में शुद्ध घी मिल पाना अपने आप में एक अनोखी बात है. बाजार में मिलने वाले घी में शुद्धता की पहचान कर पाना मुश्किल है, और ज्यादातर घी में मिलावटी पदार्थ को मिलाकर बेचा जाता है. साथ ही, बाजार में क्रीम से देसी घी निकालने का चलन बहुत बढ़ गया है. लोगों के बीच धारणा है कि डिब्बांबद मिलावटी घी खाने से कई बेहतर है क्रीम से निकला घी खाना, लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्रीम से निकला घी शरीर को सिर्फ बीमारी और फैट ही देता है.

चरक संहिता में कहा गया है, “सर्वस्नेहेषु श्रेष्ठं घृतम्," जिसका अर्थ है कि सभी फैटयुक्त पदार्थों में घी सर्वोत्तम है. आयुर्वेद में घी को फैट रहित माना गया है, जिसमें किसी तरह का ट्रांस फैट नहीं होता है. आयुर्वेद में घी बनाने की सही विधि भी बताई गई है, जिसका पालन सदियों से हमारे देश में होता आ रहा है, लेकिन समय की कमी और आधुनिकता ने सब कुछ बदलकर रख दिया है. पहले दूध से दही जमाया जाता है, फिर दही को मथकर माखन निकाला जाता है, और अंत में उसी माखन को पकाकर घृत तैयार किया जाता है, लेकिन आज सीधा दूध से मलाई को इकट्ठा कर घी निकाल दिया जाता है, जिसमें फैट ज्यादा और पोषक तत्व कम होते हैं.

कैसे पकता है नेचुरल घी

नेचुरल तरीके से बनाए गए घी को मटके में धीमी आंच पर पकाने की परंपरा रही है, जिससे घी में केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि पाचन में आसानी और शरीर के लिए बलवर्धक रहा है. प्राकृतिक तरीके से बनाए गए घी को बनाने से पहले दूध को दही के रूप में जमाया जाता है, जो उसके गुणों में वृद्धि करता है. दही में मौजूद प्राकृतिक जीवाणु दही को पौष्टिक और पाचन में आसान बनाते हैं, और उससे निकले मक्खन में वही सारे गुण होते हैं.

प्राकृतिक तरीके से बना घी आसानी से डाइजेस्‍ट होता है, पाचन अग्नि को भी बैलेंस करता है, धातुओं को पोषण देता है, और शरीर का ओज भी बरकरार रखता है. वहीं, सीधा मलाई या क्रीम से बनाए गए घी में दही जमाने वाला चरण नहीं होता है, जिससे घी की गुणवत्ता कम होती है. सीधे क्रीम से घी निकालने पर हाथ में घी नहीं, प्योर फैट आती है. इसका सेवन करने से सिर्फ मोटापा और बीमारी ही मिलती है.

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FAQ

सवाल 1: शुद्ध घी की पहचान कैसे करें?
जवाब: शुद्ध घी को दही जमाकर माखन निकालने की पारंपरिक विधि से बनाते हैं, जिसमें पोषण और स्वाद बेहतर होता है.

सवाल 2: क्रीम से निकला घी क्यों हानिकारक है?
जवाब: क्रीम से निकला घी सिर्फ फैट देता है, इसमें पोषक तत्व कम होते हैं और यह मोटापा व बीमारी बढ़ा सकता है.

सवाल 3: आयुर्वेद में घी को कैसे माना गया है?
जवाब: आयुर्वेद में घी को फैट रहित और सर्वोत्तम माना गया है जिसमें ट्रांस फैट नहीं होता.
 

इनपुट: IANS

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