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हो रहा है गर्दन और सिर दर्द? तकिया हो सकता है कारण, आज ही बदलें

गलत या पुराना तकिया नींद की क्‍वालिटी खराब करता है और गर्दन के दर्द व सांस की समस्याएं बढ़ा सकता है. तकिए में धूल और डस्ट माइट्स एलर्जी व अस्थमा जैसी समस्याओं को जन्म देते हैं, इसलिए नियमित बदलाव जरूरी है. सिंथेटिक तकिए जल्दी खराब होते हैं जबकि मेमोरी फोम और लेटेक्स तकिए अधिक टिकाऊ होते हैं.

हो रहा है गर्दन और सिर दर्द? तकिया हो सकता है कारण, आज ही बदलें
अच्‍छी नींद के लिए जरूरी है सही तकिया. फोटो: Pexels

हम अकसर अच्छी नींद के लिए बिस्तर, मैट्रस, या कमरे के माहौल पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक जरूरी चीज को नजरअंदाज कर देते हैं, और वो है तकिया. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि गलत या पुराना तकिया न केवल नींद की गुणवत्ता खराब करता है, बल्कि शरीर के पोश्चर और सांस से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ा सकता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि तकिया कब और क्यों बदलना चाहिए. 

अगर आप भी अपने पुराने तकिए को बदलने पर विचार कर रहे हैं, और रातभर बेहतर नींद लेना चाहते हैं, तो Flipkart आपके लिए टॉप ब्रांड के तकिए लेकर आया है. लेकिन इससे पहले आइए कुछ जरूरी बातों पर नजर डालते हैं.

आजकल गर्दन और सिर दर्द की समस्या क्यों बढ़ती जा रही है?
 

सबसे पहले बात करते हैं शरीर के पोश्चर की. हमारे शरीर की रीढ़ की हड्डी एक सीधी रेखा में रहने के लिए बनी होती है, खासकर सोते समय. अगर तकिया बहुत ज्यादा ऊंचा या पतला हो, तो यह गर्दन को सही सहारा नहीं दे पाता. इससे रीढ़ का संतुलन बिगड़ जाता है और गर्दन की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है. इसी कारण सुबह उठने पर दर्द या अकड़न महसूस होती है. इसलिए सही ऊंचाई वाले तकिए का इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि मांसपेशियों को आराम मिले.

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पुराने तकिए कैसे एलर्जी और सांस की परेशानी बढ़ा सकते हैं

दूसरा बड़ा कारण है एलर्जी और सांस से जुड़ी परेशानियां. समय के साथ तकिए के अंदर धूल, पसीना, त्वचा के छोटे-छोटे कण और सूक्ष्मजीव जमा होने लगते हैं. इन्हें डस्ट माइट्स कहा जाता है. रिसर्च के अनुसार, ये छोटे जीव एलर्जी, अस्थमा और आंखों में जलन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं. भले ही हम तकिए का कवर बदलते रहें या उसे धोते रहें, लेकिन उसके अंदर जमा गंदगी पूरी तरह साफ नहीं हो पाती. यही वजह है कि डॉक्टर और नींद विशेषज्ञ समय-समय पर तकिया बदलने की सलाह देते हैं.

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तकिए की ऊंचाई सही न हो तो गर्दन पर क्यों बढ़ता है दबाव

आमतौर पर विशेषज्ञ हर दो से तीन साल में तकिया बदलने की सलाह देते हैं, लेकिन यह पूरी तरह उसके मटेरियल पर निर्भर करता है. जो तकिए सिंथेटिक फाइबर से बने होते हैं, वे जल्दी अपना आकार खो देते हैं और उनमें गंदगी भी ज्यादा जमा होती है, इसलिए उन्हें एक से डेढ़ साल में बदलना बेहतर माना जाता है.

वहीं मेमोरी फोम जैसे मटेरियल लंबे समय तक अपना आकार बनाए रखते हैं, इसलिए इन्हें तीन से चार साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है. लेटेक्स तकिए सबसे ज्यादा टिकाऊ माने जाते हैं और सही देखभाल के साथ कई साल तक चल सकते हैं.

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तकिए को उसके साथ दिए गए निर्देशों के अनुसार धोना चाहिए. इससे ऊपर की गंदगी और बैक्टीरिया कम होते हैं. हालांकि, कुछ मटेरियल जैसे मेमोरी फोम और लेटेक्स को पानी से धोना सही नहीं होता. ऐसे में केवल ऊपर के दाग साफ करने और कवर को नियमित रूप से बदलने की सलाह दी जाती है.

ये हैं टॉप ब्रांड के तकिए

FAQ
 

सवाल 1: तकिया कब और क्यों बदलना चाहिए?
जवाब: तकिया हर दो से तीन साल में बदलना चाहिए ताकि एलर्जी और गर्दन दर्द जैसी समस्याएं न हों.

सवाल 2: गलत तकिये से क्या समस्याएं हो सकती हैं?
जवाब: गलत तकिया नींद खराब करता है, गर्दन दर्द और सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ाता है.

सवाल 3: तकिए में एलर्जी कैसे बढ़ती है?
जवाब: तकिए में धूल और डस्ट माइट्स जमा होकर एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ाते हैं.

इनपुट: IANS

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