नया साल शुरू हो चुका है और अपने साथ तमाम उम्मीदें, आशाएं और बेहतर भविष्य की कामनाएं लेकर आ चुका है. त्योहारों का दौर शुरू हो चुका है. और हम सब भी आने वाले त्योहारों को लेकर उत्साहित होते हुए नजर आ रहे है. लेकिन बदलते समय और पंचांग के बीच अकसर अब हर त्योहार दो दिन मनाए जाने लगे हैं. ऐसे में लोगों ने अभी से इंटरनेट पर ये सर्च करना शुरू कर दिया है कि होली,दीवाली और करवाचौथ, रक्षाबंधन जैसे त्योहार कब आने वाले हैं.
क्या होता है अधिकमास | What is Adhikmas
साल 2026 कई मायनों में खास रहने वाला है. वजह है अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. इस एक अतिरिक्त महीने के कारण न सिर्फ हिंदू पंचांग में 12 की जगह 13 महीने हो जाएंगे, बल्कि पूरे साल का त्योहारों का कैलेंडर आगे-पीछे हो जाएगा. जो त्योहार हमें किसी तय तारीख के आसपास देखने की आदत है, वे 2026 में थोड़ा जल्दी या काफी देरी से आते नजर आएंगे.
असल में हिंदू पंचांग चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है. चंद्र वर्ष करीब 354 दिन का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिन का. इन दोनों में हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बनता है. इसी अंतर को बैलेंस करने के लिए हर तीन साल में एक अधिकमास जोड़ा जाता है. साल 2026 में यही संतुलन ज्येष्ठ माह में बनेगा, इसलिए इस साल दो ज्येष्ठ महीने होंगे. ज्योतिषियों के अनुसार, अधिकमास 17 मई से 15 जून 2026 के बीच रहेगा.
इस बदलाव का असर साफ दिखाई देगा. साल के शुरुआती छह महीनों में पड़ने वाले ज्यादातर त्योहार 2025 के मुकाबले करीब 10 दिन पहले आ जाएंगे, जबकि साल के आखिरी हिस्से के त्योहार 16 से 19 दिन तक देरी से पड़ेंगे. हालांकि मकर संक्रांति जैसे सौर पर्व पर इसका असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह सूर्य की चाल पर आधारित है और आमतौर पर 14 या 15 जनवरी को ही रहती है.
आइए आपको बताते हैं कि आपके फेवरेट त्योहार साल 2026 में कब आने वाले हैं-
होली 3-4 मार्च के आसपास मनाई जाएगी. महाशिवरात्रि फरवरी के मध्य में आएगी. जबकि चैत्र नवरात्रि और रामनवमी मार्च में ही निपट जाएंगी. अक्षय तृतीया और बुद्ध पूर्णिमा भी अप्रैल-मई में पहले पड़ेंगी.
रक्षाबंधन अगस्त के आखिर में, जन्माष्टमी सितंबर की शुरुआत में और गणेश चतुर्थी सितंबर के मध्य में आएगी. वहीं शारदीय नवरात्र, दशहरा और दीपावली तो साफ तौर पर देरी से पड़ेंगी. खास बात यह है कि दीपावली 2026 में 8 नवंबर को होगी, यानी 2025 की तुलना में करीब 18 दिन बाद.
अधिकमास का धार्मिक महत्व भी कम नहीं है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब यह अतिरिक्त महीना बना तो कोई देवता इसका स्वामी नहीं बनना चाहता था. तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाया और इसे नाम मिला पुरुषोत्तम मास. इसलिए इस महीने को भक्ति, जप, दान और साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है.
सालभर लोगों को इन त्योहारों का बेसब्री से इंतजार रहता है, कुछ अपना फंक्शन अरेंज करते हैं, तो कुछ अपने समय अनुसार घर के रेनोवेशन की तैयारी प्लान करने लगते हैं, लेकिन आखिर पल में जब ये पता चलता है कि पसंदीदा त्योहार उस समय पर नहीं है, जो आपने सोचा था, तो मन उदास होने लगता है. चूंकि मॉर्डन होते घरों में अब हर काम मोबाइल पर निर्भर करने चला है, ऐसे में समय पर इंटरनेट भी आपकी दुविधा को दूर करे, कभी-कभी मुश्किल हो जाता है. यही वो पल होता है जब हम हमारी दादी-नानी की भाषा में कहे जाने वाले देसी कलैंडर की याद आने लगती है.
अगर आप भी चाहते हैं कि आपके त्योहारों का आनंद किरकिरा न हो, तो ये कैलेंडर आपकी मदद कर सकते हैं-
इनपुट: IANS Hindi
(ये लेख उन प्रोडक्ट्स और सर्विसेज का ज़िक्र कर सकता है जो एफिलिएट मार्केटिंग के जरिए उपलब्ध होते हैं. NDTV Convergence Limited (“NDTV”) ऐसे कैंपेन में शामिल रहते हुए भी अपनी एडिटोरियल आज़ादी बनाए रखने की कोशिश करता है. बताए गए किसी भी प्रोडक्ट या सर्विस के प्रदर्शन या दावों की ज़िम्मेदारी NDTV नहीं लेता.)
NDTVSHOPPING पर पाएं टॉप ब्रांड के फ़ैशन और ब्यूटी प्रोडक्ट, लेटेस्ट किचन अप्लायंसेज़ और मोबाइल पर शानदार डील