वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि रोजमर्रा की डाइट में क्या खाया जाए ताकि पेट भी भरा रहे और वजन भी कंट्रोल में रहे. खासकर नाश्ते और खाने के समय लोग अकसर कंफ्यूज हो जाते हैं कि चीला बेहतर है या रोटी, और अगर चीला तो सूजी का या बेसन का. सही जानकारी के बिना गलत चुनाव वजन घटाने की रफ्तार को धीमा कर सकता है.
भारतीय घरों में सूजी का चीला, बेसन का चीला और गेहूं की रोटी तीनों ही आमतौर पर बनते हैं. सुबह नाश्ते में चीला और दोपहर या रात में रोटी खाना कई लोगों की आदत होती है. लेकिन अगर मकसद वजन कम करना है, तो सिर्फ पेट भरना काफी नहीं होता, बल्कि ये भी देखना जरूरी होता है कि कौन सा ऑप्शन ज्यादा देर तक भूख कंट्रोल करता है और शरीर को पोषण देता है. आइए जानते हैं इन तीनों में क्या फर्क है और वजन घटाने के लिए कौन सा ऑप्शन ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.
बेसन का चीला
बेसन का चीला वजन घटाने वालों के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला ऑप्शन माना जाता है. इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और बार बार भूख लगने से बचाता है. यह ब्लड शुगर लेवल को भी बैलेंस रखने में मदद करता है, जिससे अचानक खाने की क्रेविंग नहीं होती.
अगर बेसन के चीले में हरी सब्जियां मिलाकर कम तेल में बनाया जाए, तो यह एक हेल्दी और पौष्टिक नाश्ता बन जाता है.
- बेसन का चीला क्यों फायदेमंद है?
- हाई प्रोटीन और फाइबर से भरपूर
- पेट लंबे समय तक भरा रखता है
- ब्लड शुगर को बैलेंस रखने में मदद
- वजन घटाने के लिए बेहतरीन नाश्ता
गेहूं की रोटी
गेहूं की रोटी भारतीय थाली का अहम हिस्सा है और रोजाना खाई जाती है. इसमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और थोड़ी मात्रा में प्रोटीन होता है. यह शरीर को धीरे धीरे एनर्जी देती है और कुछ समय तक भूख नहीं लगने देती.
हालांकि वजन घटाने के दौरान रोटी की मात्रा पर कंट्रोल जरूरी होता है. अगर 1–2 रोटी सब्जी और सलाद के साथ खाई जाए, तो यह डाइट का हिस्सा बन सकती है. लेकिन रात में ज्यादा रोटी खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे वजन घटाने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है.
- गेहूं की रोटी के फायदे और सीमाएं
- लंबे समय तक एनर्जी देती है
- पेट कुछ समय तक भरा रहता है
- सीमित मात्रा में ही वजन घटाने में फायदेमंद
- ज्यादा खाने से वजन घटाने में रुकावट
सूजी का चीला
सूजी का चीला हल्का होता है और पचाने में आसान माना जाता है. जिन लोगों को भारी नाश्ता नहीं पचता, उनके लिए यह एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. हालांकि, सूजी में ज्यादातर कार्बोहाइड्रेट होते हैं और प्रोटीन व फाइबर की मात्रा कम होती है.
इसी वजह से इसे खाने के बाद पेट ज्यादा देर तक भरा नहीं रहता और जल्दी भूख लग सकती है. वजन घटाने के दौरान सूजी का चीला कभी कभी हल्के नाश्ते के
रूप में लिया जा सकता है, लेकिन इसे रोजाना लेना सबसे बेहतर ऑप्शन नहीं माना जाता.
सूजी का चीला किसके लिए सही है?
- हल्का और जल्दी पचने वाला
- तुरंत एनर्जी देता है
- ज्यादा देर तक पेट नहीं भरता
- कभी कभार नाश्ते के लिए ठीक
पेट भरा रखने के मामले में कौन बेहतर?
अगर बात लंबे समय तक पेट भरा रखने की हो, तो बेसन का चीला इस मामले में सबसे आगे रहता है. इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर भूख को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. गेहूं की रोटी भी तब फायदेमंद होती है जब उसे सब्जी या दाल के साथ सही मात्रा में खाया जाए. वहीं, सूजी का चीला जल्दी पच जाने के कारण जल्दी भूख लगने का कारण बन सकता है.
वजन कम करने के लिए किसी एक चीज पर पूरी तरह निर्भर रहना जरूरी नहीं है, बल्कि संतुलन बनाना सबसे अहम होता है. हालांकि, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर बेसन का चीला इस सफर में सबसे ज्यादा मदद करता है. सही समय पर सही मात्रा में खाना और थोड़ी फिजिकल एक्टिविटी के साथ आपकी वजन घटाने की यात्रा ज्यादा आसान और असरदार बन सकती है. इन सभी को आप Flipkart से घर बैठे ऑर्डर कर सकते हैं.
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