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Pradosh Vrat January 2026: मिलेगी महादेव-पार्वती की कृपा, पर इन चीजों को जरूर रखें अपने पास 

Pradosh Vrat January 2026: 30 जनवरी यानी आज देशभर में माघ माह का अंतिम शुक्र प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है, जो भगवान शिव को समर्पित है. यह व्रत विशेष रूप से शुक्रवार को होने के कारण महत्वपूर्ण है. प्रदोष व्रत के दौरान सुबह 5:25 से 6:18 तक ब्रह्म मुहूर्त, दोपहर 12:13 से 12:56 तक अभिजीत मुहूर्त और शाम 6:18 से 7:46 तक अमृत काल रहेगा.चीजों की जरूरत जरूर होगी.

Pradosh Vrat January 2026: मिलेगी महादेव-पार्वती की कृपा, पर इन चीजों को जरूर रखें अपने पास 
Pradosh Vrat पर होती है शिवजी की पूजा. फोटो: AI

Pradosh Vrat January 2026: 30 जनवरी यानी आज देशभर में माघ माह का अंतिम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है. यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित माना गया है और शुक्रवार को होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जा रहा है. दृक पंचांग के अनुसार, 30 जनवरी शुक्रवार को शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 11 बजकर 9 मिनट बजे तक रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी. यह तिथि प्रदोष व्रत के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है. शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर करेंगे और नक्षत्र आर्द्रा रहेगा, जो 31 जनवरी की सुबह 3 बजकर 27 मिनट तक प्रभावी रहेगा.

Pradosh Vrat January 2026 का शुभ मुहूर्त

शुभ समय की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 18 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक और अमृत काल शाम 6 बजकर 18 मिनट से 7 बजकर 46 मिनट तक है.

वहीं, योग वैधृति शुक्रवार शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. सूर्योदय 7 बजकर 10 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगा. यदि कोई शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया कार्य करना चाहते हैं, तो राहुकाल का विशेष ध्यान रखें. 

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30 जनवरी को कब होगा राहुकाल? | When is Rahukaal on 30 January 2026

30 जनवरी को राहुकाल सुबह 11 बजकर 14 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. इस दौरान कोई नया कार्य शुरू न करें. अन्य अशुभ समय में यमगण्ड दोपहर 3 बजकर 17 मिनट से 4 बजकर 38 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 8 बजकर 31 मिनट से 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा.

क्‍या है Pradosh Vrat का महत्‍व | Significance of Pradosh Vrat 2026

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व बहुत अधिक है. यह व्रत देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाकर पाठ करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. व्रत रखने वाले भक्त संयमपूर्वक दिन व्यतीत करते हैं और शाम को प्रदोष काल में पूजा-अर्चना करते हैं.

शुक्रवार होने से यह व्रत शुक्र ग्रह के दोषों को दूर करने और वैवाहिक सुख, धन-समृद्धि के लिए भी विशेष फलदायी माना जाता है. वहीं, विष्णुप्रिया के पूजन के लिए भी शुक्रवार खास महत्व रखता है.

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FAQ

सवाल 1: प्रदोष व्रत कब मनाया जाता है?
जवाब: प्रदोष व्रत माघ माह की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है, विशेषकर शुक्रवार को इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है.

सवाल 2: शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व क्या है?
जवाब: यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने, शुक्र ग्रह दोष दूर करने, वैवाहिक सुख और धन-समृद्धि के लिए किया जाता है.

सवाल 3: प्रदोष व्रत के दौरान कौन से शुभ मुहूर्त हैं?
जवाब: शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त 5:25 से 6:18, अभिजीत मुहूर्त 12:13 से 12:56, और अमृत काल 18:18 से 19:46 तक है.

Input: IANS

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