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Dhundiraj Chaturthi: मुहूर्त, भद्रा, पंचक समेत इन चीजों का रखें ध्‍यान, व्रत के लिए जरूरी सामान आज ही खरीदें

Dhundiraj Chaturthi 2026: ढुण्ढिराज चतुर्थी 21 फरवरी को है, इस दिन भगवान गणेश की पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विघ्न नष्ट होते हैं. पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:12 से 12:58 तक रहेगा, वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:13 से 6:04 तक बेस्‍ट रहने वाला है.

Dhundiraj Chaturthi: मुहूर्त, भद्रा, पंचक समेत इन चीजों का रखें ध्‍यान, व्रत के लिए जरूरी सामान आज ही खरीदें
Ganpati puja में काम आएंगी ये चीजें. फोटो: META AI

Dhundiraj Chaturthi 2026: भगवान गणेश की उपासना के लिए विशेष महत्व रखने वाली ढुण्ढिराज चतुर्थी (Dhundhiraj Chaturthi) 21 फरवरी को है. मत्स्य पुराण में इसे मनोरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश के ढुण्ढिराज स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विघ्नों का नाश होता है. 

क्‍या कहता है दृक पंचांग

दृक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 20 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 21 फरवरी की दोपहर 1 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर यह तिथि 20 फरवरी (शनिवार) को पूरे दिन मान्य होगी. इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जो पूजा के लिए अत्यंत उत्तम हैं. रवि योग सुबह 6 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगा, जो सूर्य की शक्ति से युक्त होता है और कार्य सिद्धि में सहायक माना जाता है.

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21 जनवरी का अभिजित मुहूर्त 

अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक है, जिसे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक माना जाता है. अन्य शुभ काल में विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से 3 बजकर 14 बजे तक, अमृत काल शाम 4 बजकर 49 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.

ब्रह्म मुहूर्त 

ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और पूजा के लिए सर्वोत्तम होता है. वहीं, सूर्योदय 6 बजकर 54 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 15 मिनट पर होगा. हालांकि, कुछ अशुभ समय भी हैं, जिनसे बचना चाहिए. भद्रा सुबह 6 बजकर 54 मिनट से दोपहर 1 बजे तक रहेगी, इसलिए इस दौरान पूजा-पाठ या शुभ कार्य की मनाही होती है. पंचक भी सुबह 6 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 7 मिनट तक प्रभावी रहेगा.

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कब होगा राहुकाल

राहुकाल सुबह 9 बजकर 45 मिनट से 11 बजकर 10 मिनट तक, यमगंड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 25 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 6 बजकर 54 मिनट से 8 बजकर 19 मिनट तक रहेगा. इन कालों में कोई नया कार्य या पूजा -पाठ नहीं करनी चाहिए.

ढुण्ढिराज चतुर्थी पर गणेश जी की आराधना का विशेष महत्व है. गणपति को लाल फूल, दूर्वा, मोदक और सिंदूर चढ़ाकर विधिवत पूजा करना. मंत्र का जाप या स्त्रोत का पाठ विशेष फलदायी होगा. इस व्रत से बुद्धि, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है. जीवन से बाधाओं का नाश होता है और सफलता के द्वार खुलते हैं.

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FAQ

सवाल 1:ढुण्ढिराज चतुर्थी कब मनाई जाती है?
जवाब: यह फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है, जो 21 फरवरी 2026 को है.

सवाल 2: ढुण्ढिराज चतुर्थी का धार्मिक महत्व क्या है?
जवाब: इस दिन भगवान गणेश के ढुण्ढिराज स्वरूप की पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और विघ्नों का नाश होता है.

सवाल 3: ढुण्ढिराज चतुर्थी पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या हैं?
जवाब: अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:12 से 12:58, विजय मुहूर्त 2:28 से 3:14 और अमृत काल शाम 4:49 से 6:21 तक शुभ हैं.

इनपुट: IANS

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