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रोज़ पहनने वाले स्नीकर क्यों करने लगते हैं बदबू, कारण समझिए और जानें उन्हें दूर रखने के आसान घरेलू उपाय

रोज़ पहनने वाले स्नीकर में बदबू आना एक आम समस्या है, लेकिन इसके पीछे की वजहें अक्सर हमारी रोज़मर्रा की आदतों से जुड़ी होती हैं. पसीना, नमी, सही तरह से न सुखाना और जूतों की देखभाल में थोड़ी सी लापरवाही मिलकर इस परेशानी को बढ़ा देती है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस बदबू से बचा जा सकता है और स्नीकर को लंबे समय तक ताज़ा रखा जा सकता है. तो Myntra पर स्नीकर्स की बेस्ट डील्स भी देख सकते हैं, जहां स्टाइल और आराम दोनों मिलते हैं.

रोज़ पहनने वाले स्नीकर क्यों करने लगते हैं बदबू, कारण समझिए और जानें उन्हें दूर रखने के आसान घरेलू उपाय
रोज़ पहनने वाले स्नीकर क्यों करने लगते हैं बदबू और इसे समय रहते कैसे रोकें; फोटो क्रेडिट: Pexels

अपनी पसंदीदा स्नीकर पहनते ही अगर अचानक कोई अजीब सी गंध आ जाए, तो पूरा मूड खराब हो जाता है. यह अनुभव लगभग हर किसी का होता है. नया जूता होता है, सुबह की वॉक में पहना, कभी मार्केट गए, कभी कैजुअल आउटिंग में, शायद कॉलोनी में अचानक क्रिकेट भी खेल लिया. फिर एक दिन बिना किसी चेतावनी के बदबू आने लगती है.

Popular culprits that make sneakers develop a foul smell

रोज़ पहनने वाले स्नीकर क्यों करने लगते हैं बदबू और इसे समय रहते कैसे रोकें; फोटो क्रेडिट: Pexels

अकसर लोग पसीने को दोष देते हैं, लेकिन बात इससे थोड़ी आगे की है. असली वजह हमारी रोज़ की आदतों, मौसम और जूतों को रखने के तरीक़े से जुड़ी होती है. जिन शहरों में हवा में नमी रहती है और बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी भरा रहता है, वहां स्नीकर जल्दी खराब होते हैं, यह बात ज़्यादातर लोग नहीं समझते.

यह आर्टिकल बताता है कि स्नीकर उम्मीद से जल्दी बदबू क्यों करने लगते हैं और वो कौन सी छोटी-छोटी आदतें हैं जो अनजाने में इस समस्या को बढ़ा देती हैं. हर वजह यह दिखाती है कि जूते खरीदने के बाद भी उनके अंदर क्या चलता रहता है.
 

स्नीकर जल्दी बदबू क्यों करने लगते हैं

पसीना नहीं, बैक्टीरिया असली वजह है  

अकसर माना जाता है कि पसीने से बदबू आती है, जबकि खुद पसीने में कोई गंध नहीं होती. असल में दिक्कत बैक्टीरिया की होती है, जो गर्म और नमी वाली जगह में तेजी से बढ़ते हैं. हमारे पैर दिन भर पसीना छोड़ते रहते हैं, खासकर ऐसे मौसम में जहां ज़्यादा ठंड नहीं रहती. जब यह नमी जूते के अंदर रह जाती है, तो बैक्टीरिया के लिए जगह तैयार हो जाती है. ज़्यादातर स्नीकर, खासकर सिंथेटिक मटीरियल वाले, हवा को अंदर-बाहर नहीं होने देते. इससे जूते के अंदर गर्म और बंद माहौल बन जाता है, जिसमें बैक्टीरिया पसीने को तोड़कर बदबू पैदा करते हैं.

यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे गीले कपड़े वॉशिंग मशीन में रात भर पड़े रह जाएं. बदबू पानी से नहीं, बल्कि उस नमी में पनपे चीज़ों से आती है. स्नीकर में भी यही होता है. अगर नमी जल्दी सूखे नहीं और अंदर ही फंसी रहे, तो बदबू उतनी ही जल्दी शुरू हो जाती है. सही तरीके से सूखने का मौका न मिले, तो नया स्नीकर भी कुछ ही दिनों में महकने लगता है.

रोज़ एक ही जोड़ी पहनना

अकसर लोग सुविधा के चक्कर में एक ही स्नीकर हर जगह पहन लेते हैं. सुबह की वॉक, कॉलेज, छोटे-मोटे काम, शाम की आउटिंग, सब कुछ उसी जोड़ी में. यह आसान ज़रूर लगता है, लेकिन जूते को सूखने का मौका नहीं देता. दिन भर पहनने के बाद स्नीकर में पसीने और बाहर की नमी दोनों जमा हो जाती हैं. अगर उन्हें कम से कम 24 घंटे आराम मिले, तो नमी निकल सकती है. लेकिन रोज़ पहनने से नमी अंदर ही बनी रहती है और बैक्टीरिया बढ़ते रहते हैं.

दो जोड़ी स्नीकर बदल-बदल कर पहनने से काफ़ी फर्क पड़ता है. इसके लिए महंगी कलेक्शन रखने की ज़रूरत नहीं. साधारण दो जोड़ी भी बदबू को काफी हद तक रोक सकती हैं. यह आदत छोड़ देना वैसा ही है जैसे हर दिन गीले तौलिए का इस्तेमाल करना. शुरू में ठीक लगता है, लेकिन कुछ दिन बाद बदबू तय है.
 

मोज़े न पहनना या गलत मोज़े पहनना  

गर्मी में बिना मोज़े स्नीकर पहनना अच्छा लग सकता है, लेकिन इससे समस्या और बढ़ती है. मोज़े पसीना सोख लेते हैं, ताकि वह सीधे जूते में न जाए. बिना मोज़े के सारा पसीना अंदर की लाइनिंग में चला जाता है. मोज़े पहनना ही काफ़ी नहीं होता, उनका मटीरियल भी ज़रूरी है. सिंथेटिक मोज़े गर्मी और नमी को फंसा लेते हैं. बहुत मोटे कॉटन मोज़े भी नमी रोक सकते हैं.

ऐसे मोज़े बेहतर होते हैं जो पसीना सोखकर पैर को सूखा रखें. लोकल मार्केट में मिलने वाले सस्ते ऑप्शन भी इस काम में ठीक होते हैं, ज़रूरी नहीं कि महंगे ब्रांड ही हों. छोटी सी बात जैसे मोज़े, यह तय करती है कि स्नीकर कितने दिन फ्रेश रहेंगे. इसे नज़रअंदाज़ करना वैसा है जैसे बिना मसाले खाना बनाना.
 

मौसम और नमी का बड़ा असर  

मौसम स्नीकर की हालत पर चुपचाप असर डालता है. जहां नमी ज़्यादा रहती है, वहां जूते आसानी से सूखते नहीं. बाहर से सूखे दिखने वाले स्नीकर अंदर से गीले रह सकते हैं. बरसात में हालत और बिगड़ जाती है. पानी भरी सड़कों पर चलने से नमी जूते के कपड़े के अंदर चली जाती है और सही से सूखे बिना ही रह जाती है. ठंडे इलाकों की तरह यहां जूते रातों-रात नहीं सूखते. इस देरी का फायदा बैक्टीरिया उठाते हैं. खिड़की के पास या पंखे के नीचे रखने से मदद मिलती है, लेकिन ज़्यादातर लोग जूते सीधा किसी कोने में रख देते हैं. यह आदत धीरे-धीरे बदबू को स्थायी बना देती है.

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रोज़ पहनने वाले स्नीकर क्यों करने लगते हैं बदबू और इसे समय रहते कैसे रोकें; फोटो क्रेडिट: Pexels

जूतों को रखने का गलत तरीका  

दिन भर पहनने के बाद स्नीकर कहां रखे जाते हैं, यह बहुत मायने रखता है. बंद अलमारी या अंधेरे कोने में रखने से नमी फंस जाती है. खुली जगह, जहां हवा आती-जाती रहे, वहां नमी निकल पाती है. हल्की धूप भी बैक्टीरिया को कम करती है. अकसर लोग जूतों को बॉक्स में रख देते हैं ताकि शेप खराब न हो. यह तरीका नए या कम इस्तेमाल होने वाले जूतों के लिए ठीक है, लेकिन रोज़ पहनने वाले स्नीकर को खुली हवा चाहिए.

नियमित सफ़ाई न करना  

अकसर स्नीकर तभी धोए जाते हैं जब बाहर से बहुत गंदे दिखने लगें. जबकि बदबू उससे पहले ही बनने लगती है. अंदर पसीना, धूल और बैक्टीरिया जमा होते रहते हैं. हर कुछ हफ्तों में हल्की सफ़ाई काफी होती है. इसे नज़रअंदाज़ करना वैसा ही है जैसे बेडशीट समय पर न बदलना. दिखने में साफ़ लगती हैं, लेकिन ताज़गी खत्म हो जाती है.

पैरों की सफ़ाई पर ध्यान न देना  

अकसर दोष जूतों को दिया जाता है, जबकि पैरों की सफ़ाई भी उतनी ही ज़रूरी है. रोज़ पैर धोना, पूरी तरह सुखाना और नाखून साफ़ रखना बहुत फर्क डालता है. गंदे पैरों के साथ साफ़ जूते की उम्मीद करना सही नहीं.

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स्नीकर एक दिन में खराब नहीं होते. रोज़ की आदतें, मौसम और थोड़ी सी लापरवाही मिलकर यह समस्या बनाती हैं. अच्छी बात यह है कि समाधान भी आसान हैं. थोड़ा ध्यान रखने से स्नीकर लंबे वक्त तक ताज़ा रह सकते हैं. आख़िरकार, स्नीकर सिर्फ़ जूते नहीं होते, बल्कि रोज़ की ज़िंदगी का हिस्सा होते हैं. और उन्हें फ्रेश रखना महंगे प्रोडक्ट से नहीं, सही आदतों से संभव होता है. आप भी अपने पसंद के स्नीकर्स Myntra से ऑर्डर कर सकते हैं.

(ये लेख उन प्रोडक्ट्स और सर्विसेज का ज़िक्र कर सकता है जो एफिलिएट मार्केटिंग के जरिए उपलब्ध होते हैं. NDTV Convergence Limited (“NDTV”) ऐसे कैंपेन में शामिल रहते हुए भी अपनी एडिटोरियल आज़ादी बनाए रखने की कोशिश करता है. बताए गए किसी भी प्रोडक्ट या सर्विस के प्रदर्शन या दावों की ज़िम्मेदारी NDTV नहीं लेता.)

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