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जल रही है स्किन, हो रही है Tanning? तो ये Sunscreen देंगे स्किन को कूलिंग इफेक्‍ट

सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाकर सनबर्न का कारण बनती हैं. ये किरणें सीधे धूप के अलावा परावर्तित होकर भी त्वचा तक पहुंचती हैं. सनबर्न से बचने के लिए सुबह दस से दोपहर चार बजे तक धूप से बचें, सनस्क्रीन लगाएं और हल्के कपड़े पहनें. पानी पीना और चिकित्सकीय सलाह लेना भी जरूरी है. सूर्य की रोशनी विटामिन डी के लिए आवश्यक है, लेकिन संतुलित समय तक धूप लेना चाहिए ताकि त्वचा कैंसर और सनबर्न से बची रहे.

जल रही है स्किन, हो रही है Tanning? तो ये Sunscreen देंगे स्किन को कूलिंग इफेक्‍ट
Sunburn से बचाव है जरूरी. फोटो: Pexels

सूर्य पृथ्वी पर जीवन का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है. यह न केवल हमें प्रकाश देता है, बल्कि पौधों और मनुष्यों के लिए ऊर्जा का भी मुख्य आधार है. हालांकि, इसकी किरणें हमेशा लाभकारी नहीं होतीं—कभी-कभी तेज धूप त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे सनबर्न जैसी समस्या हो जाती है. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सूरज की रोशनी हमें क्यों जलाती है.

सूर्य की रोशनी स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. यह विटामिन डी बनाती है, जो हड्डियों के लिए जरूरी है, लेकिन संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है. ज्यादा समय धूप में रहने से त्वचा का कैंसर भी हो सकता है. अंतरराष्ट्रीय सूर्य दिवस पर हमें सूर्य की उपयोगिता और उससे होने वाले नुकसान दोनों को समझना चाहिए.

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सूर्य धरती की तरफ कई तरह की ऊर्जा भेजता है. इसमें तीन मुख्य प्रकार की किरणें होती हैं- इन्फ्रारेड रेडिएशन (गर्मी), विजिबल लाइट जो हम देख सकते हैं और अल्ट्रावॉयलेट (यूवी) लाइट. हम अल्ट्रावॉयलेट किरणों को अपनी आंखों से नहीं देख सकते. ये हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं.

सूर्य हर समय ऊर्जा की लहरें यानी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स भेजता रहता है. इनमें इन्फ्रारेड लहरें सबसे कम ऊर्जा वाली और लंबी होती हैं, जो गर्मी का एहसास कराती हैं. विजिबल लाइट मध्यम ऊर्जा वाली होती है, जबकि अल्ट्रावॉयलेट लहरें सबसे ज्यादा ऊर्जा वाली होती हैं. इन्हीं अल्ट्रावॉयलेट किरणों की वजह से त्वचा जलती है. जब त्वचा पर ज्यादा अल्ट्रावॉयलेट किरणें पड़ती हैं तो त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है. कोशिकाएं मरने लगती हैं और शरीर इस पर प्रतिक्रिया देता है. परिणामस्वरुप त्वचा लाल हो जाना, सूजन, दर्द और जलन. इसे ही सनबर्न कहते हैं.

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खास बात है कि अल्ट्रावॉयलेट किरणें हर जगह पहुंच सकती हैं. सनबर्न सिर्फ सीधी धूप में ही नहीं होता. अल्ट्रावॉयलेट किरणें पानी, बर्फ, कंक्रीट और रेत से टकराकर वापस लौट सकती हैं. यानी छाते के नीचे बैठे रहने पर भी सनबर्न हो सकता है. बादलों के पार भी ये किरणें पहुंच जाती हैं, इसलिए बादल वाले दिन भी सावधानी बरतनी चाहिए.

सनबर्न से बचाव के उपाय 

सुबह 10 बजे से दोपहर 4 बजे तक ज्यादा धूप में न निकलें. 
पूरे शरीर को ढकने वाले हल्के रंग के कपड़े पहनें. 
चौड़े किनारे वाली टोपी और चश्मा लगाएं. 
SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन (सनब्लॉक) लगाएं. इसे हर 3-4 घंटे में दोबारा लगाएं. 
पानी ज्यादा पीएं ताकि शरीर हाइड्रेट रहे. 
डॉक्टर्स की सलाह है कि सनबर्न होने पर ठंडे पानी से सेंक करें. 
मॉइश्चराइजर लगाएं और ज्यादा गंभीर स्थिति में चिकित्सक से संपर्क करें.

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FAQ

सवाल 1: सूरज की किरणें त्वचा को क्यों जलाती हैं?
जवाब: अल्ट्रावॉयलेट किरणें त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर सनबर्न का कारण बनती हैं.

सवाल 2: सनबर्न से बचने के लिए क्या उपाय हैं?
जवाब: धूप में कम समय बिताएं, सनस्क्रीन लगाएं, कपड़े पहनें और पानी पीते रहें.

सवाल 3: अल्ट्रावॉयलेट किरणें कैसे काम करती हैं?
जवाब: ये सबसे ज्यादा ऊर्जा वाली किरणें हैं जो त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं.

इनपुट: IANS

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